संसार में 'नाक शब्द प्रतिष्ठा के अर्थों में प्रयुक्त होता है। जब कोई पुरुष अनुचित कार्य्य कर बैठता है तो संसार उसे कहता है कि 'उसकी नाक कट गई'। प्रतिष्ठित कुल के सपूत अपने पूर्वजों की नाक रखने के लिए ऋण उठाकर कुलोचित व्यवहार में प्रवृत्त होते हैं, सो अपने कार्य्य में विघ्न न चाहने वाले भद्र-पुरुष को चाहिए कि वह सदैव अपनी, अपने पूर्वजों की, अपने कुल एवं अपने देश की लम्बी नाक का ध्यान रखे, अर्थात्—ऐसा कोई ओछा कार्य्य करने को उद्यत न हो जिससे नाक कट जाए। यह शिक्षा केवल हाथी की लम्बी नाक से ही मिल सकती है क्योंकि प्रकृति ने अन्य किसी जीव को इतनी लम्बी नाक प्रदान नहीं की। इसलिए रेखाचित्र में कलाकार हाथी की ही नाक लगाने के लिए बाध्य है।